समाज

जेल और जहालत में जमात
पेड़ काट कर डाल को सींचने से वृक्ष के जीवन की आशा व्यर्थ है। देश में मुस्लिम आबादी के साथ ...
गई जाति पानी में
जाति जनगणना का इतिहास खंगालने पर पता चलता है कि देश में पिछली बार सन 1931 में अंग्रेजों ने जातियों ...
गरीब की जान पर मौत का ट्रायल
निरंजन लाल को कभी उम्मीद भी न थी कि उनके दिल का इलाज कुछ इस तरह मुफ्त में करने की ...
“राइट दू रिजेक्ट” के नाम पर वोटर धोखा तो नहीं खायेगा
2013 के चुनाव वोटरों के लिये पहली बार उम्मीदवारों को बाकायदा बटन दबाकर खारिज करने वाला भी चुनाव होगा। यानी ...
दंगे की आग में जल गया कोयला
दंगा हुआ मुजफ्फरनगर में। लोगों के घर जले और दिल भी। लेकिन दंगों पर सद्भावना दिखानेवाली कांग्रेस सरकार ने क्या ...
बदहाल नौनिहाल को बचाओ
भारत में केंद्र और राज्य सरकार के ढेरों ऐसी योजनाएं हैं जिसके माध्यम से सरकारी अमला बच्चों के बेहतर भविष्य ...
सजा ऐसी कि रूह कांप जाए
निर्भया के बलात्करियों को अदालत ने दोषी तो पाया है लेकिन वह उन्हें फांसी देगी या नहीं, यह उहापोंह बनी ...
दंगों का दंश
देश में शांति का काल हो या अशांति का। मजहबी हिंसा रोज-रोज की बात बन चुकी है। दूर-दराज के क्षेत्रों ...
तालिबानी आतंक की ना’पाक’ जमीन
पाकिस्तान के नव निर्वाचित प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ भले ही आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए कोई विशेष रणनीति तैयार करने ...