राजनीति

आडवाणी युग के बाद की भाजपा
नागपुर में पहली बार सीमेंट की सड़क 1995 में बनी तो रिक्शे वालों ने आंदोलन छेड़ दिया । रिक्शे वालों ...
84 का दर्द, गुजरात की त्रासदी और बेजुबान आदिवासी
जिस पत्रकार ने गृह मंत्री पी चिदबंरम पर जूता उछाल कर 84 के दंगों के घाव को उभारा, उसी पत्रकार ...
“20 साल पहले राजीव गांधी का अपहरण करना चाहते थे नक्सली और 20 साल बाद मनमोहन सिंह के अपहरण की जरुरत नहीं समझते माओवादी”
ठीक बीस साल पहले 1989 नक्सली संगठन पीपुल्स वार ग्रुप के महासचिव सीतारमैय्या से जब यह सवाल किया गया था ...
विकल्प देते देते प्रधानमंत्री विकल्प क्यों तालाश रहे हैं
नक्सलियों के हिमायतियों ने भी ग्रामीण-आदिवासियों के विकास का कोई वैकल्पिक समाधान नहीं दिया है। यह बात और किसी ने ...
नक्सली, युद्धबंदी और सरकार
ये पहला मौका है जब माओवादी प्रभावित इलाकों में सरकार के खिलाफ लड़ेंगे और मरेंगे की तर्ज पर ग्रामीण आदिवासियों ...
आतंरिक सुरक्षा को खतरे का मतलब ?
माओवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की बात गृह मंत्रालय की रिपोर्ट कर रही है और प्रधानमंत्री माओवाद को देश के ...
रेड कॉरिडोर में लाल क्रांति का सपना (पार्ट 2)
चार राज्यों का रेड कॉरीडोर मध्य प्रदेश से निकले छत्तीसगढ से होते हुये झारखंड, बिहार और बंगाल को भी अपने ...
संघ या भाजपा में किसका ज़हर किसे डसेगा ?
बीजेपी को कौन ठीक करेगा ? ये कुछ ऐसा ही है जैसे पीसा की झुकती मीनार को कौन सीधा कर ...
रेडकॉरिडोर में लाल क्रांति का सपना
कामरेड अब आगे आप क्या करेगे । वापस जंगल लौट जाऊंगा । कम से कम मरुंगा तो अपनों के बीच ...