Author: संजय स्वदेश

बिहार के गोपलगंज जिले के हथुआ के मूल निवासी। दसवी के बाद 1995 दिल्ली पढ़ने पहुंचे। 12वीं पास करने के बाद किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक स्नातकोत्तर। केंद्रीय हिंदी संस्थान के दिल्ली केंद्र से पत्रकारिता एवं अनुवाद में डिप्लोमा। अध्ययन काल से ही स्वतंत्र लेखन के साथ कैरियर की शुरुआत। आकाशवाणी के रिसर्च केंद्र में स्वतंत्र कार्य। अमर उजाला में प्रशिक्षु पत्रकार। सहारा समय, हिन्दुस्तान, नवभारत टाईम्स समेत देश के कई समाचार पत्रों में एक हजार से ज्यादा फीचर लेख प्रकाशित। दिल्ली से प्रकाशित दैनिक महामेधा से नौकरी। दैनिक भास्कर-नागपुर, दैनिक 1857- नागपुर, दैनिक नवज्योति-कोटा, हरिभूमि-रायपुर के साथ कार्य अनुभव। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के अलावा विभिन्न वेबसाइटों के लिए सक्रिय लेखन कार्य जारी…

नक्सलियों का ‘स्मार्ट’ अटैक
छत्तीसगढ़ नक्सली हमले से एक दिन पहले गुवहाटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मार्ट पुलिसिंग की वकालत करते हुए मजबूत ...
पथरा गई पीली क्रांति
विकास की रफ्तार में खेती के दरकिनार होने का मुद्दा गाहे-बगाहे सतह पर आता है। मुद्दे में इतनी गर्मी नहीं ...
जेल और जहालत में जमात
पेड़ काट कर डाल को सींचने से वृक्ष के जीवन की आशा व्यर्थ है। देश में मुस्लिम आबादी के साथ ...
गई जाति पानी में
जाति जनगणना का इतिहास खंगालने पर पता चलता है कि देश में पिछली बार सन 1931 में अंग्रेजों ने जातियों ...
गरीब की जान पर मौत का ट्रायल
निरंजन लाल को कभी उम्मीद भी न थी कि उनके दिल का इलाज कुछ इस तरह मुफ्त में करने की ...
दंगे की आग में जल गया कोयला
दंगा हुआ मुजफ्फरनगर में। लोगों के घर जले और दिल भी। लेकिन दंगों पर सद्भावना दिखानेवाली कांग्रेस सरकार ने क्या ...
बदहाल नौनिहाल को बचाओ
भारत में केंद्र और राज्य सरकार के ढेरों ऐसी योजनाएं हैं जिसके माध्यम से सरकारी अमला बच्चों के बेहतर भविष्य ...
दंगों का दंश
देश में शांति का काल हो या अशांति का। मजहबी हिंसा रोज-रोज की बात बन चुकी है। दूर-दराज के क्षेत्रों ...
भारत को कंगाल करता चीन का माल
पड़ोसी देश चीन कभी भी भारत का विश्वस्त नहीं रहा। लेकिन वैश्विक स्तर पर बदले हालात और बाजार के प्रभाव ...