Author: पुण्य प्रसून बाजपेयी

पुण्य प्रसून बाजपेयी के पास प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में 20 साल से ज़्यादा का अनुभव है। प्रसून देश के इकलौते ऐसे पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी पत्रकारिता में बेहतरीन कार्य के लिए वर्ष 2005 का ‘इंडियन एक्सप्रेस गोयनका अवार्ड फ़ॉर एक्सिलेंस’ और प्रिंट मीडिया में बेहतरीन रिपोर्ट के लिए 2007 का रामनाथ गोयनका अवॉर्ड मिला।

चुनाव में पेटियों में भर भर कौन लुटा रहा है अरबों रुपया
एक लाख करोड़ रुपये भारत जैसे देश के लिये क्या मायने रखते हैं यह देश के 90 फिसदी हिन्दुस्तान से ...
क्या पाकिस्तान सिर्फ टैरर ही नहीं फेल स्टेट भी है
अगर हेडली सही है तो पाकिस्तानी सत्ता के लिये लश्कर भारत के खिलाफ जेहाद का सबसे मजबूत ढाल भी है ...
पत्रकारिता करते हुये भी पत्रकार बने रहने की चुनौती
पत्रकारिता मीडिया में तब्दील हो जाये। मीडिया माध्यम माना जाने लगे। माध्यम सत्ता का सबसे बेहतरीन हथियार हो जाये। तो ...
भारत-पाकिस्तान के बीच एलओसी का सच
लश्कर-ए-तोएबा , जैश-ए मोहमम्द, हिजबुल मुज्जाहिद्दीन ,हरकत-उ मुज्जाहिद्दीन , पाकिसातन तालिबान और इस फेरहिस्त में 19 से ज्यादा और नाम ...
दिल्ली इस्लामाबाद के बीच पठानकोट
तो पठानकोट हमला अपने आप में दो सवाल है। पहला, टैरर अटैक है या फिर पाकिस्तानी सेना की मदद से ...
सियासी बिसात पर संविधान और आंबेडकर भी प्यादा बन गये
इतिहास के पन्नों के आसरे जिस तरह की कवायद संसद के भीतर राजनीतिक दलों ने की उसने झटके में यह ...
मोदी के ब्रांड अंबेसडर ने ही मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया !
जनता ,नेता ,मंत्री दादरी के अखलाख को भूल गई लेकिन शहरुख याद हैं। सरकारें सुनपेड में दो दलित बच्चो को ...
चले गये राम मंदिर की आस लिए
जो ना तो राजनीति का नायक बना। ना ही हिन्दुत्व का झंडाबरदार। लेकिन जो सपना देखा उसे पूरा करने में ...
करियर के पहले संपादक ने सिखाया , “पत्रकारिता जीने का तरीका है”
मौजूदा दौर में पत्रकारिता करते हुये पच्चीस-छब्बीस बरस पहले की पत्रकारिता में झांकना और अपने ही शुरुआती करियर के दौर ...