Author: मनीराम शर्मा

लेखक पेशे से अधिवक्ता और स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। प्रस्तुत लेख के विचार लेखक के स्वयं के हैं इससे भारत वार्ता का सहमत होना अनिवार्य नहीं है।

पुलिस राज के साये में भारतीय लोकतंत्र
भारत के विधि आयोग की एक सौ बहत्तरवीं रिपोर्ट 14 दिसम्बर 2001 :एक समीक्षा भारत के विधि आयोग ने स्वप्रेरणा ...
भारत का फलता-फूलता मुकदमेबाजी उद्योग
भारतीय न्यायतंत्र उर्फ मुकदमेबाजी उद्योग ने बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध करवा रखा है। देश में अर्द्ध–न्यायिक निकायों को छोड़कर ...